केशर माताजी की स्तुति :-
सुन मेरी माता म्हार वासिनी, कोई तेरा पार न पाया है।
पान सुपारी ध्वजा नारियल तेरी भेंट चढ़ाया है।।
केसरिया बाना तेरे अंग बिराजे,
केसर तिलक लगाया है।। सुन मेरी....
नंगे - नंगे पावों तेरे दर पर आया है।
आसोज शुक्ल नवमी रात जगाया है,
फिर दशमी को जड़ुला उतरवाया है।। सुन मेरी....
ऊँचे ऊँचे पर्वतों बीच बन्यो देवरो थारो,
धुप दिप नैवेद्य आरती कसार घुघरी का भोग लगाया है।
जो कोई म्हार वासिनी की आरती नित्य गावे,
मन इच्छा फल पाया है।। सुन मेरी माता....
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केसर तिलक लगाया है।। सुन मेरी....
नंगे - नंगे पावों तेरे दर पर आया है।
आसोज शुक्ल नवमी रात जगाया है,
फिर दशमी को जड़ुला उतरवाया है।। सुन मेरी....
ऊँचे ऊँचे पर्वतों बीच बन्यो देवरो थारो,
धुप दिप नैवेद्य आरती कसार घुघरी का भोग लगाया है।
जो कोई म्हार वासिनी की आरती नित्य गावे,
मन इच्छा फल पाया है।। सुन मेरी माता....
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